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mahabharat 3.141.21-22: महाबाहो! हम सब लोग आज गन्धमादन पर्वत की घाटियों में प्रवेश करेंगे और उस पुरुषोत्तम अर्जुन को देखने के लिए उत्सुक होंगे, जो बल और प्रभाव में देवराज इन्द्र के समान है, जिसके वेग में वायु निवास करती है, जिसके मुख में चन्द्रमा निवास करता है और जिसके क्रोध में अनन्त मृत्यु निवास करती है।   |   mahabharat अध्याय 3.141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  3.141.21-22 
यस्य बाहुबले तुल्य: प्रभावे च पुरंदर:।
जवे वायुर्मुखे सोम: क्रोधे मृत्यु: सनातन:॥ २१॥
ते वयं तं नरव्याघ्रं सर्वे वीर दिदृक्षव:।
प्रवेक्ष्यामो महाबाहो पर्वतं गन्धमादनम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! हम सब लोग आज गन्धमादन पर्वत की घाटियों में प्रवेश करेंगे और उस पुरुषोत्तम अर्जुन को देखने के लिए उत्सुक होंगे, जो बल और प्रभाव में देवराज इन्द्र के समान है, जिसके वेग में वायु निवास करती है, जिसके मुख में चन्द्रमा निवास करता है और जिसके क्रोध में अनन्त मृत्यु निवास करती है।
 
Mahabaho! We all will enter the valleys of Gandhamadana mountain today, eager to see that best of men, Arjuna, who is equal to Devraj Indra in strength and influence, in whose speed resides the wind, in whose mouth resides the moon and in whose anger resides eternal death.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)