Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.141.2: यद्यपि हम दुर्बल और पीड़ित हैं, फिर भी हम उत्साहपूर्वक एक दूसरे से बातें कर रहे हैं और उस मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं जहाँ जाना असम्भव है। इसका एक ही कारण है, हम सबके हृदय में अर्जुन के दर्शन की प्रबल उत्कंठा है। | mahabharat अध्याय 3.141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यद्यपि हम दुर्बल और पीड़ित हैं, फिर भी हम उत्साहपूर्वक एक दूसरे से बातें कर रहे हैं और उस मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं जहाँ जाना असम्भव है। इसका एक ही कारण है, हम सबके हृदय में अर्जुन के दर्शन की प्रबल उत्कंठा है।
Although we are weak and suffering, yet we are talking to each other in enthusiasm and are moving forward on the path where going is impossible, there is only one reason for this, we all have a strong eagerness in our hearts to see Arjun. 2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥