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mahabharat 3.141.18: हे वीर भीमसेन! मुझसे पहले भीमसेन के बल से ही समस्त रत्नों से बनी हुई, तीनों लोकों की प्रसिद्ध सभा मेरे अधीन थी।   |   mahabharat अध्याय 3.141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.141.18 
यस्य बाहुबलाद् वीर सभा चासीत् पुरा मम।
सर्वरत्नमयी ख्याता त्रिषु लोकेषु पाण्डव॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे वीर भीमसेन! मुझसे पहले भीमसेन के बल से ही समस्त रत्नों से बनी हुई, तीनों लोकों की प्रसिद्ध सभा मेरे अधीन थी।
 
O brave Bhimasena! Before me, due to his strength, the famous assembly of the three worlds, made of all the gems, was under my control. 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)