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mahabharat 3.141.17: उसके पराक्रम से हमने पहले ही नाना प्रकार की असंख्य निधियाँ एकत्रित कर ली थीं, जिन्हें सुयोधन ने छीन लिया ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 3.141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.141.17 
रत्नानि यस्य वीर्येण दिव्यान्यासन् पुरा मम।
बहूनि बहुजातीनि यानि प्राप्त: सुयोधन:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उसके पराक्रम से हमने पहले ही नाना प्रकार की असंख्य निधियाँ एकत्रित कर ली थीं, जिन्हें सुयोधन ने छीन लिया ॥17॥
 
By his prowess we had earlier accumulated innumerable treasures of various kinds, which Suyodhana took away. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)