Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.141.1: युधिष्ठिर बोले, "भीमसेन, नकुल, सहदेव और द्रौपदी! तुम सब लोग ध्यानपूर्वक सुनो। यह निश्चित है कि पूर्वजन्म के कर्म बिना भोगे कभी नष्ट नहीं हो सकते। देखो, उन्हीं के कारण आज हम राजकुमार होकर भी वनों में भटक रहे हैं।"   |   mahabharat अध्याय 3.141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 141: युधिष्ठिरका भीमसेनसे अर्जुनको न देखनेके कारण मानसिक चिन्ता प्रकट करना एवं उनके गुणोंका स्मरण करते हुए गन्धमादन पर्वतपर जानेका दृढ़ निश्चय करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.141.1 
युधिष्ठिर उवाच
भीमसेन यमौ चोभौ पाञ्चालि च निबोधत।
नास्ति भूतस्य नाशो वै पश्यतास्मान् वनेचरान्॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "भीमसेन, नकुल, सहदेव और द्रौपदी! तुम सब लोग ध्यानपूर्वक सुनो। यह निश्चित है कि पूर्वजन्म के कर्म बिना भोगे कभी नष्ट नहीं हो सकते। देखो, उन्हीं के कारण आज हम राजकुमार होकर भी वनों में भटक रहे हैं।"
 
Yudhishthira said, "Bhimasena, Nakul, Sahadeva and Draupadi! All of you listen carefully. It is certain that the past deeds can never be destroyed without being suffered. Look, because of them, today we are wandering in the forests despite being princes."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)