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mahabharat 3.140.9: आप भी निद्रा को जीतने वाले और युद्ध में कभी पीठ न दिखाने वाले महात्मा अर्जुन को न देख पाने के कारण अत्यन्त दुःखी हो रहे हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.140: भीमसेनका उत्साह तथा पाण्डवोंका कुलिन्दराज सुबाहुके राज्यमें होते हुए गन्धमादन और हिमालय पर्वतको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 140: भीमसेनका उत्साह तथा पाण्डवोंका कुलिन्दराज सुबाहुके राज्यमें होते हुए गन्धमादन और हिमालय पर्वतको प्रस्थान  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.140.9 
तव चाप्यरतिस्तीव्रा वर्तते तमपश्यत:।
गुडाकेशं महात्मानं संग्रामेष्वपलायिनम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
आप भी निद्रा को जीतने वाले और युद्ध में कभी पीठ न दिखाने वाले महात्मा अर्जुन को न देख पाने के कारण अत्यन्त दुःखी हो रहे हैं॥9॥
 
You are also feeling very sad due to not having seen Mahatma Arjun who is victorious over sleep and who never turns his back in the battle.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)