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mahabharat 3.140.4-5: अथवा हे विशाल नेत्रों वाले भीम! तुम सहदेव, धौम्य, सारथि, रसोइया, समस्त सेवकों, रथों, घोड़ों तथा अन्य सभी ब्राह्मणों को, जो यात्रा के कष्ट को सहन नहीं कर सकते, साथ लेकर यहाँ से लौट जाओ। ॥4-5॥   |   mahabharat अध्याय 3.140: भीमसेनका उत्साह तथा पाण्डवोंका कुलिन्दराज सुबाहुके राज्यमें होते हुए गन्धमादन और हिमालय पर्वतको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 140: भीमसेनका उत्साह तथा पाण्डवोंका कुलिन्दराज सुबाहुके राज्यमें होते हुए गन्धमादन और हिमालय पर्वतको प्रस्थान  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  3.140.4-5 
अथवा सहदेवेन धौम्येन च समं विभो।
सूतै: पौरोगवैश्चैव सर्वैश्च परिचारकै:॥ ४॥
रथैरश्वैश्च ये चान्ये विप्रा: क्लेशासहा: पथि।
सर्वैस्त्वं सहितो भीम निवर्तस्वायतेक्षण॥ ५॥
 
 
अनुवाद
अथवा हे विशाल नेत्रों वाले भीम! तुम सहदेव, धौम्य, सारथि, रसोइया, समस्त सेवकों, रथों, घोड़ों तथा अन्य सभी ब्राह्मणों को, जो यात्रा के कष्ट को सहन नहीं कर सकते, साथ लेकर यहाँ से लौट जाओ। ॥4-5॥
 
Or, O big-eyed Bhima, you should return from here along with Sahadeva, Dhoumya, the charioteer, the cook, all the attendants, the chariots, the horses and all the other brahmins who cannot bear the hardships of the journey. ॥ 4-5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)