Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.140.22-23: लोमशजी बोले- कुन्तीपुत्र! तपस्या के बल से ही गन्धमादन पर्वत तक पहुँचा जा सकता है। हम सभी को तपस्या का बल संचित करना होगा। महाराज! नकुल, सहदेव, भीमसेन, मैं और आप सभी तपस्या के बल से ही अर्जुन को देख सकेंगे। | mahabharat अध्याय 3.140: भीमसेनका उत्साह तथा पाण्डवोंका कुलिन्दराज सुबाहुके राज्यमें होते हुए गन्धमादन और हिमालय पर्वतको प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लोमशजी बोले- कुन्तीपुत्र! तपस्या के बल से ही गन्धमादन पर्वत तक पहुँचा जा सकता है। हम सभी को तपस्या का बल संचित करना होगा। महाराज! नकुल, सहदेव, भीमसेन, मैं और आप सभी तपस्या के बल से ही अर्जुन को देख सकेंगे।
Lomashji said— Kunti's son! One can reach Gandhamadana mountain only by the power of penance. We all have to accumulate the power of penance. Maharaj! Nakul, Sahadev, Bhimsen, I and you all will be able to see Arjun only by the power of penance.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥