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mahabharat 3.140.21: वैशम्पायनजी कहते हैं - हे जनमेजय! तब सुन्दरी द्रौपदी ने हँसकर कहा - 'भरत! मैं तुम्हारे साथ चलूँगी; मेरी चिन्ता मत करो।'॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 3.140: भीमसेनका उत्साह तथा पाण्डवोंका कुलिन्दराज सुबाहुके राज्यमें होते हुए गन्धमादन और हिमालय पर्वतको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 140: भीमसेनका उत्साह तथा पाण्डवोंका कुलिन्दराज सुबाहुके राज्यमें होते हुए गन्धमादन और हिमालय पर्वतको प्रस्थान  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.140.21 
वैशम्पायन उवाच
तत: कृष्णाब्रवीद् वाक्यं प्रहसन्ती मनोरमा।
गमिष्यामि न संताप: कार्यो मां प्रति भारत॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे जनमेजय! तब सुन्दरी द्रौपदी ने हँसकर कहा - 'भरत! मैं तुम्हारे साथ चलूँगी; मेरी चिन्ता मत करो।'॥ 21॥
 
Vaishmpayana says - O Janamejaya! Then the beautiful Draupadi smilingly said - 'Bharata! I will go with you; don't worry about me.'॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)