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श्लोक 3.140.21  |
वैशम्पायन उवाच
तत: कृष्णाब्रवीद् वाक्यं प्रहसन्ती मनोरमा।
गमिष्यामि न संताप: कार्यो मां प्रति भारत॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| वैशम्पायनजी कहते हैं - हे जनमेजय! तब सुन्दरी द्रौपदी ने हँसकर कहा - 'भरत! मैं तुम्हारे साथ चलूँगी; मेरी चिन्ता मत करो।'॥ 21॥ |
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| Vaishmpayana says - O Janamejaya! Then the beautiful Draupadi smilingly said - 'Bharata! I will go with you; don't worry about me.'॥ 21॥ |
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