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श्लोक 3.140.2  |
संनिवर्तय कौन्तेय क्षुत्पिपासे बलाश्रयात्।
ततो बलं च दाक्ष्यं च संश्रयस्व वृकोदर॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| वृकोदर! तुम बल का सहारा लेकर अपनी भूख-प्यास मिटा सकते हो। फिर शारीरिक बल और चतुराई का सहारा लो॥2॥ |
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| Vrikodara! You can quench your hunger and thirst by taking the help of strength. Then take the help of physical strength and cleverness.॥2॥ |
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