Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.140.17: हे राजन! मुझे ऐसा ही लगता है। आप दुःखी न हों। माद्री के वीर पुत्र नकुल और सहदेव दोनों ही अत्यंत कोमल हैं। जहाँ कहीं भी वे किसी कठिन स्थान पर असहाय हो जाएँ, मैं उन्हें नदी पार करा दूँगा। 17. | mahabharat अध्याय 3.140: भीमसेनका उत्साह तथा पाण्डवोंका कुलिन्दराज सुबाहुके राज्यमें होते हुए गन्धमादन और हिमालय पर्वतको प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इति मे वर्तते बुद्धिर्मा राजन् विमना भव।
सुकुमारौ तथा वीरौ माद्रीनन्दिकरावुभौ।
दुर्गे संतारयिष्यामि यत्राशक्तौ भविष्यत:॥ १७॥
अनुवाद
हे राजन! मुझे ऐसा ही लगता है। आप दुःखी न हों। माद्री के वीर पुत्र नकुल और सहदेव दोनों ही अत्यंत कोमल हैं। जहाँ कहीं भी वे किसी कठिन स्थान पर असहाय हो जाएँ, मैं उन्हें नदी पार करा दूँगा। 17.
O King! I think so. Do not be sad. The brave sons of Madri, Nakula and Sahadeva, are both very tender. Wherever they become helpless in a difficult place, I will help them cross the river. 17.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥