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mahabharat 3.14.9-10: 'उसे युद्ध की बड़ी इच्छा है, आज मैं उसका अभिमान चूर-चूर कर दूँगा। हे आनर्तवासियों! मुझे सच-सच बताओ। वह कहाँ है? मैं जहाँ भी होगा, वहाँ जाऊँगा और कंस तथा केशी को मारने वाले उस कृष्ण को मारकर ही लौटूँगा। मैं अपने शस्त्रों को छूता हूँ और सत्य की शपथ लेता हूँ कि कृष्ण को मारे बिना मैं वापस नहीं लौटूँगा।'॥9-10॥   |   mahabharat अध्याय 3.14: द्यूतके समय न पहुँचनेमें श्रीकृष्णके द्वारा शाल्वके साथ युद्ध करने और सौभविमानसहित उसे नष्ट करनेका संक्षिप्त वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 14: द्यूतके समय न पहुँचनेमें श्रीकृष्णके द्वारा शाल्वके साथ युद्ध करने और सौभविमानसहित उसे नष्ट करनेका संक्षिप्त वर्णन  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  3.14.9-10 
तस्य युद्धार्थिनो दर्पं युद्धे नाशयितास्म्यहम्।
आनर्ता: सत्यमाख्यात तत्र गन्तास्मि यत्र स:॥ ९॥
तं हत्वा विनिवर्तिष्ये कंसकेशिनिषूदनम्।
अहत्वा न निवर्तिष्ये सत्येनायुधमालभे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'उसे युद्ध की बड़ी इच्छा है, आज मैं उसका अभिमान चूर-चूर कर दूँगा। हे आनर्तवासियों! मुझे सच-सच बताओ। वह कहाँ है? मैं जहाँ भी होगा, वहाँ जाऊँगा और कंस तथा केशी को मारने वाले उस कृष्ण को मारकर ही लौटूँगा। मैं अपने शस्त्रों को छूता हूँ और सत्य की शपथ लेता हूँ कि कृष्ण को मारे बिना मैं वापस नहीं लौटूँगा।'॥9-10॥
 
‘He has a great desire for war, today I will shatter his pride. O residents of Anarta! Tell me the truth. Where is he? I will go wherever he is and will return only after killing that Krishna who killed Kansa and Keshi. I touch my weapons and swear in the name of truth that I will not return without killing Krishna.'॥ 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)