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mahabharat 3.14.20: नरेश्वर! तत्पश्चात् मैंने पाञ्चजन्य शंख बजाकर शाल्व को युद्धभूमि में बुलाया और स्वयं भी युद्ध के लिए उपस्थित हुआ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 3.14: द्यूतके समय न पहुँचनेमें श्रीकृष्णके द्वारा शाल्वके साथ युद्ध करने और सौभविमानसहित उसे नष्ट करनेका संक्षिप्त वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 14: द्यूतके समय न पहुँचनेमें श्रीकृष्णके द्वारा शाल्वके साथ युद्ध करने और सौभविमानसहित उसे नष्ट करनेका संक्षिप्त वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.14.20 
तत: प्रध्माप्य जलजं पाञ्चजन्यमहं नृप।
आहूय शाल्वं समरे युद्धाय समवस्थित:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! तत्पश्चात् मैंने पाञ्चजन्य शंख बजाकर शाल्व को युद्धभूमि में बुलाया और स्वयं भी युद्ध के लिए उपस्थित हुआ॥20॥
 
Nareshwar! Thereafter, I called Shalva to the battlefield by blowing the Panchajanya conch and myself also appeared for the war. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)