Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.14.18-19: हे महान कुरुराज! हे पृथ्वी के राजा! उसने आनर्त देश में जो महान संहार किया था, मुझ पर जो अभियोग लगाया था तथा उस पापी के अत्यन्त बढ़े हुए अहंकार को सोचकर मैंने सौभनगर का विनाश करने का प्रयत्न किया। मैंने उसे सर्वत्र खोजा और वह समुद्र के एक द्वीप पर मिला। | mahabharat अध्याय 3.14: द्यूतके समय न पहुँचनेमें श्रीकृष्णके द्वारा शाल्वके साथ युद्ध करने और सौभविमानसहित उसे नष्ट करनेका संक्षिप्त वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आनर्तेषु विमर्दं च क्षेपं चात्मनि कौरव।
प्रवृद्धमवलेपं च तस्य दुष्कृतकर्मण:॥ १८॥
तत: सौभवधायाहं प्रतस्थे पृथिवीपते।
स मया सागरावर्ते दृष्ट आसीत् परीप्सता॥ १९॥
अनुवाद
हे महान कुरुराज! हे पृथ्वी के राजा! उसने आनर्त देश में जो महान संहार किया था, मुझ पर जो अभियोग लगाया था तथा उस पापी के अत्यन्त बढ़े हुए अहंकार को सोचकर मैंने सौभनगर का विनाश करने का प्रयत्न किया। मैंने उसे सर्वत्र खोजा और वह समुद्र के एक द्वीप पर मिला।
O great Kuru king! O king of the earth! Thinking of the great carnage he had caused in the Anart country, the accusations he had made against me and the arrogance of that sinner which had grown immensely, I set out to destroy Saubhanagar. I searched for him everywhere and found him on an island in the ocean.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥