Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.14.16: हे कुरुश्रेष्ठ! यहाँ से द्वारका जाते समय मैंने मर्तिकावतक देश के निवासी दुष्ट और दुराचारी राजा शाल्व के विषय में सब सुना, जिसने मेरे प्रति दुष्टतापूर्ण व्यवहार किया था (निन्दनीय बातें कही थीं)।॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.14: द्यूतके समय न पहुँचनेमें श्रीकृष्णके द्वारा शाल्वके साथ युद्ध करने और सौभविमानसहित उसे नष्ट करनेका संक्षिप्त वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 14: द्यूतके समय न पहुँचनेमें श्रीकृष्णके द्वारा शाल्वके साथ युद्ध करने और सौभविमानसहित उसे नष्ट करनेका संक्षिप्त वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.14.16 
तमश्रौषमहं गत्वा यथावृत्त: स दुर्मति:।
मयि कौरव्य दुष्टात्मा मार्तिकावतको नृप:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! यहाँ से द्वारका जाते समय मैंने मर्तिकावतक देश के निवासी दुष्ट और दुराचारी राजा शाल्व के विषय में सब सुना, जिसने मेरे प्रति दुष्टतापूर्ण व्यवहार किया था (निन्दनीय बातें कही थीं)।॥16॥
 
O best of the Kurus! On going from here to Dwaraka, I heard all about the wicked and evil-minded King Shalva, a resident of the Martikavataka country, who had behaved wickedly towards me (said slanderous things).॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)