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mahabharat 3.14.12-13: राजन! वह यह भी कहता था कि 'आज मैं उस दुष्ट, पापी और विश्वासघाती कृष्ण को शिशुपाल के वध के क्रोध से यमलोक भेज दूँगा। उस पापी ने मेरे भाई राजा शिशुपाल को मारा है, अतः मैं भी उसका वध करूँगा।॥12-13॥   |   mahabharat अध्याय 3.14: द्यूतके समय न पहुँचनेमें श्रीकृष्णके द्वारा शाल्वके साथ युद्ध करने और सौभविमानसहित उसे नष्ट करनेका संक्षिप्त वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 14: द्यूतके समय न पहुँचनेमें श्रीकृष्णके द्वारा शाल्वके साथ युद्ध करने और सौभविमानसहित उसे नष्ट करनेका संक्षिप्त वर्णन  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  3.14.12-13 
अद्य तं पापकर्माणं क्षुद्रं विश्वासघातिनम्।
शिशुपालवधामर्षाद् गमयिष्ये यमक्षयम्॥ १२॥
मम पापस्वभावेन भ्राता येन निपातित:।
शिशुपालो महीपालस्तं वधिष्ये महीपते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
राजन! वह यह भी कहता था कि 'आज मैं उस दुष्ट, पापी और विश्वासघाती कृष्ण को शिशुपाल के वध के क्रोध से यमलोक भेज दूँगा। उस पापी ने मेरे भाई राजा शिशुपाल को मारा है, अतः मैं भी उसका वध करूँगा।॥12-13॥
 
King! He also used to say that 'Today I will send that wicked, sinful and treacherous Krishna to Yamaloka due to the anger of killing Shishupal. That sinner has killed my brother King Shishupal, so I will also kill him.॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)