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mahabharat 3.14.1: युधिष्ठिर बोले - "हे वृष्णिवंश को सुख पहुँचाने वाले कृष्ण! जब यहाँ द्यूतक्रीड़ा का आयोजन हो रहा था, तब आप द्वारका में क्यों नहीं थे? उन दिनों आप कहाँ ठहरे हुए थे और उस प्रवास में आपने कौन-सा कार्य किया था?"॥1॥   |   mahabharat अध्याय 3.14: द्यूतके समय न पहुँचनेमें श्रीकृष्णके द्वारा शाल्वके साथ युद्ध करने और सौभविमानसहित उसे नष्ट करनेका संक्षिप्त वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 14: द्यूतके समय न पहुँचनेमें श्रीकृष्णके द्वारा शाल्वके साथ युद्ध करने और सौभविमानसहित उसे नष्ट करनेका संक्षिप्त वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.14.1 
युधिष्ठिर उवाच
असांनिध्यं कथं कृष्ण तवासीद् वृष्णिनन्दन।
क्व चासीद् विप्रवासस्ते किं चाकार्षी: प्रवासत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - "हे वृष्णिवंश को सुख पहुँचाने वाले कृष्ण! जब यहाँ द्यूतक्रीड़ा का आयोजन हो रहा था, तब आप द्वारका में क्यों नहीं थे? उन दिनों आप कहाँ ठहरे हुए थे और उस प्रवास में आपने कौन-सा कार्य किया था?"॥1॥
 
Yudhishthira said, "O Krishna, who makes the Vrishni clan happy! Why were you absent from Dwaraka when the game of dice was being organized here? Where were you staying during those days and what task did you accomplish during that stay?"॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)