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mahabharat 3.139.6-7: राजन! वहाँ अट्ठासी हज़ार तीव्र गति वाले गंधर्व और उनसे चौगुने किन्नर और यक्ष रहते हैं। उनके रूप और आकृतियाँ अनेक प्रकार की हैं। वे नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र धारण करते हैं और यक्षराज मणिभद्र की आराधना में तत्पर रहते हैं। 6-7॥   |   mahabharat अध्याय 3.139: पाण्डवोंकी उत्तराखण्ड-यात्रा और लोमशजीद्वारा उसकी दुर्गमताका कथन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 139: पाण्डवोंकी उत्तराखण्ड-यात्रा और लोमशजीद्वारा उसकी दुर्गमताका कथन  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  3.139.6-7 
अष्टाशीतिसहस्राणि गन्धर्वा: शीघ्रगामिन:।
तथा किंपुरुषा राजन् यक्षाश्चैव चतुर्गुणा:॥ ६॥
अनेकरूपसंस्थाना नानाप्रहरणाश्च ते।
यक्षेन्द्रं मनुजश्रेष्ठ माणिभद्रमुपासते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राजन! वहाँ अट्ठासी हज़ार तीव्र गति वाले गंधर्व और उनसे चौगुने किन्नर और यक्ष रहते हैं। उनके रूप और आकृतियाँ अनेक प्रकार की हैं। वे नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र धारण करते हैं और यक्षराज मणिभद्र की आराधना में तत्पर रहते हैं। 6-7॥
 
Rajan! There live eighty-eight thousand fast-moving Gandharvas and four times as many Kinnars and Yakshas. There are many types of their forms and shapes. They wear different types of weapons and remain engaged in the worship of Yaksharaj Manibhadra. 6-7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)