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mahabharat 3.139.17: ‘शैलपुत्री! ये लोग इन पर्वतमालाओं में प्रवेश करना चाहते हैं। तुम इनका कल्याण करो।’ समुद्र में जाने वाली गंगा नदी से ऐसा कहकर महाबली ब्राह्मण लोमश ने कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर को आदेश दिया कि ‘अब तुम ध्यान करो।’॥17॥   |   mahabharat अध्याय 3.139: पाण्डवोंकी उत्तराखण्ड-यात्रा और लोमशजीद्वारा उसकी दुर्गमताका कथन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 139: पाण्डवोंकी उत्तराखण्ड-यात्रा और लोमशजीद्वारा उसकी दुर्गमताका कथन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.139.17 
ददस्व शर्म प्रविविक्षतोऽस्य
शैलानिमाञ्छैलसुते नृपस्य।
उक्त्वा तथा सागरगां स विप्रो
यत्तो भवस्वेति शशास पार्थम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
‘शैलपुत्री! ये लोग इन पर्वतमालाओं में प्रवेश करना चाहते हैं। तुम इनका कल्याण करो।’ समुद्र में जाने वाली गंगा नदी से ऐसा कहकर महाबली ब्राह्मण लोमश ने कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर को आदेश दिया कि ‘अब तुम ध्यान करो।’॥17॥
 
'Daughter of Shaila! They want to enter these mountain ranges. You grant them welfare.' Having said this to the river Ganga, which goes to the sea, the great Brahmin Lomasha ordered Yudhishthira, the son of Kunti, that 'Now you concentrate.'॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)