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mahabharat 3.139.16: हे गंगादेवी! मैं इन्द्र के स्वर्णमय पर्वत से आपकी गर्जना सुन रहा हूँ। शुभ हो! ये राजा युधिष्ठिर अजमीढ़वंशी क्षत्रियों द्वारा सम्मानित हैं। आप पर्वतों से उनकी रक्षा करें। 16॥   |   mahabharat अध्याय 3.139: पाण्डवोंकी उत्तराखण्ड-यात्रा और लोमशजीद्वारा उसकी दुर्गमताका कथन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 139: पाण्डवोंकी उत्तराखण्ड-यात्रा और लोमशजीद्वारा उसकी दुर्गमताका कथन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.139.16 
इन्द्रस्य जाम्बूनदपर्वताद् वै
शृणोमि घोषं तव देवि गङ्गे।
गोपायैनं त्वं सुभगे गिरिभ्य:
सर्वाजमीढापचितं नरेन्द्रम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे गंगादेवी! मैं इन्द्र के स्वर्णमय पर्वत से आपकी गर्जना सुन रहा हूँ। शुभ हो! ये राजा युधिष्ठिर अजमीढ़वंशी क्षत्रियों द्वारा सम्मानित हैं। आप पर्वतों से उनकी रक्षा करें। 16॥
 
Goddess Ganga! I am hearing your roar from the golden mountain of Indra. Good luck! This king Yudhishthir is respected by the Ajmidhvanshi Kshatriyas. You protect them from the mountains. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)