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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 138: अर्वावसुकी तपस्याके प्रभावसे परावसुका ब्रह्महत्यासे मुक्त होना और रैभ्य,भरद्वाज तथा यवक्रीत आदिका पुनर्जीवित होना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.138.6 
मृगं तु मन्यमानेन पिता वै तेन हिंसित:।
अकामयानेन तदा शरीरत्राणमिच्छता॥ ६॥
 
 
अनुवाद
और उसने अपने पिता को जंगली जानवर समझकर धोखे से मार डाला। हालाँकि वह ऐसा नहीं करना चाहता था, फिर भी उसने जंगली जानवर से अपने शरीर की रक्षा के लिए यह क्रूर कार्य किया।
 
And thinking him to be a wild animal, he killed his father by deceit. Although he did not want to do so, yet he committed this cruel act to protect his body from the wild animal. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)