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mahabharat 3.138.23-25h: युधिष्ठिर! इसके बाद उपर्युक्त सभी ऋषिगण जीवित हो गए। उस समय यवक्रीत ने अग्नि सहित सभी देवताओं से पूछा - 'हे देवताओं! मैंने वेदों का अध्ययन किया है, वैदिक व्रतों का भी अनुष्ठान किया है। मैं स्वाध्यायी और तपस्वी भी हूँ, फिर भी रैभ्य मुनि मुझे इस प्रकार अनुचित रीति से कैसे मार सके?'॥23-24 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.138: अर्वावसुकी तपस्याके प्रभावसे परावसुका ब्रह्महत्यासे मुक्त होना और रैभ्य,भरद्वाज तथा यवक्रीत आदिका पुनर्जीवित होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 138: अर्वावसुकी तपस्याके प्रभावसे परावसुका ब्रह्महत्यासे मुक्त होना और रैभ्य,भरद्वाज तथा यवक्रीत आदिका पुनर्जीवित होना  »  श्लोक 23-25h
 
 
श्लोक  3.138.23-25h 
तत: प्रादुर्बभूवुस्ते सर्व एव युधिष्ठिर।
अथाब्रवीद् यवक्रीतो देवानग्निपुरोगमान्॥ २३॥
समधीतं मया ब्रह्म व्रतानि चरितानि च।
कथं च रैभ्य: शक्तो मामधीयानं तपस्विनम्॥ २४॥
तथायुक्तेन विधिना निहन्तुममरोत्तमा:।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! इसके बाद उपर्युक्त सभी ऋषिगण जीवित हो गए। उस समय यवक्रीत ने अग्नि सहित सभी देवताओं से पूछा - 'हे देवताओं! मैंने वेदों का अध्ययन किया है, वैदिक व्रतों का भी अनुष्ठान किया है। मैं स्वाध्यायी और तपस्वी भी हूँ, फिर भी रैभ्य मुनि मुझे इस प्रकार अनुचित रीति से कैसे मार सके?'॥23-24 1/2॥
 
Yudhishthira! After this all the above-mentioned sages became alive. At that time Yavakrit asked all the gods including Agni - 'O gods! I have studied the Vedas, I have also performed the Vedic fasts. I am also a self-studying and ascetic, even then how could Raibhya Muni be able to kill me in such an inappropriate manner?'॥ 23-24 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)