Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.138.21: तब अर्वावसु ने यह वरदान माँगा कि 'मेरे पिता पुनः जीवित हो जाएँ। मेरे भाई निर्दोष हों और अपने पिता की हत्या को भूल जाएँ।' | mahabharat अध्याय 3.138: अर्वावसुकी तपस्याके प्रभावसे परावसुका ब्रह्महत्यासे मुक्त होना और रैभ्य,भरद्वाज तथा यवक्रीत आदिका पुनर्जीवित होना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स चापि वरयामास पितुरुत्थानमात्मन:।
अनागस्त्वं ततो भ्रातु: पितुश्चास्मरणं वधे॥ २१॥
अनुवाद
तब अर्वावसु ने यह वरदान माँगा कि 'मेरे पिता पुनः जीवित हो जाएँ। मेरे भाई निर्दोष हों और अपने पिता की हत्या को भूल जाएँ।'
Then Arvavasu asked for this boon that 'My father should come back to life. My brothers should be innocent and they should forget about the murder of their father.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥