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mahabharat 3.137.9: शूद्र के द्वारा कहे गए इन अप्रिय वचनों को सुनकर भारद्वाज अत्यन्त दुःखी हुए और अपने प्राणहीन पुत्र के लिए विलाप करने लगे॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.137: भरद्वाजका पुत्रशोकसे विलाप करना, रैभ्यमुनिको शाप देना एवं स्वयं अग्निमें प्रवेश करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 137: भरद्वाजका पुत्रशोकसे विलाप करना, रैभ्यमुनिको शाप देना एवं स्वयं अग्निमें प्रवेश करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.137.9 
भरद्वाजस्तु तच्छ्रुत्वा शूद्रस्य विप्रियं महत्।
गतासुं पुत्रमादाय विललाप सुदु:खित:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
शूद्र के द्वारा कहे गए इन अप्रिय वचनों को सुनकर भारद्वाज अत्यन्त दुःखी हुए और अपने प्राणहीन पुत्र के लिए विलाप करने लगे॥9॥
 
Bharadwaj became very sad on hearing these unpleasant words spoken by Shudra and started lamenting over his lifeless son.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)