Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.137.4-5: 'दास! क्या कारण है कि आज अग्निदेव मुझे देखकर पहले के समान प्रसन्नता प्रकट नहीं कर रहे हैं? यहाँ भी तुम पहले के समान आदर-सत्कार नहीं कर रहे हो। क्या इस आश्रम में सब कुशल है? क्या मेरा मंदबुद्धि पुत्र रैभ्य के पास चला गया है? मुझे शीघ्र बताओ; क्योंकि मेरे मन को शांति नहीं मिल रही है।'॥5॥ | mahabharat अध्याय 3.137: भरद्वाजका पुत्रशोकसे विलाप करना, रैभ्यमुनिको शाप देना एवं स्वयं अग्निमें प्रवेश करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
किं नु मे नाग्नय: शूद्र प्रतिनन्दन्ति दर्शनम्।
त्वं चापि न यथापूर्वं कच्चित् क्षेममिहाश्रमे॥ ४॥
कच्चिन्न रैभ्यं पुत्रो मे गतवानल्पचेतन:।
एतदाचक्ष्व मे शीघ्रं न हि शुद्धॺति मे मन:॥ ५॥
अनुवाद
'दास! क्या कारण है कि आज अग्निदेव मुझे देखकर पहले के समान प्रसन्नता प्रकट नहीं कर रहे हैं? यहाँ भी तुम पहले के समान आदर-सत्कार नहीं कर रहे हो। क्या इस आश्रम में सब कुशल है? क्या मेरा मंदबुद्धि पुत्र रैभ्य के पास चला गया है? मुझे शीघ्र बताओ; क्योंकि मेरे मन को शांति नहीं मिल रही है।'॥5॥
‘Das! What is the reason that today the Agnis do not express happiness on seeing me like before? Here also you do not show the same respect as before. Is everything fine in this ashram? Has my dull-witted son gone to Raibhya? Tell me this quickly; because my mind is not getting peace.'॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥