Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.137.19: लोमशजी कहते हैं- युधिष्ठिर! इस प्रकार भारद्वाज ने नाना प्रकार के विलापों के साथ अपने पुत्र का अंतिम संस्कार किया। तत्पश्चात स्वयं भी जलती हुई अग्नि में प्रवेश कर गए। | mahabharat अध्याय 3.137: भरद्वाजका पुत्रशोकसे विलाप करना, रैभ्यमुनिको शाप देना एवं स्वयं अग्निमें प्रवेश करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लोमशजी कहते हैं- युधिष्ठिर! इस प्रकार भारद्वाज ने नाना प्रकार के विलापों के साथ अपने पुत्र का अंतिम संस्कार किया। तत्पश्चात स्वयं भी जलती हुई अग्नि में प्रवेश कर गए।
Lomashji says- Yudhishthir! In this way, Bharadwaj performed the last rites of his son with various lamentations. After that he himself entered the burning fire.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायां यवक्रीतोपाख्याने सप्तत्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राके प्रसंगमें यवक्रीतोपाख्यानविषयक एक सौ सैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥