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mahabharat 3.137.16: इस संसार में वे लोग धन्य हैं जिनके कोई संतान नहीं है, क्योंकि उन्हें पुत्र न होने का दुःख नहीं होता और वे सदा सुखपूर्वक रहते हैं ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.137: भरद्वाजका पुत्रशोकसे विलाप करना, रैभ्यमुनिको शाप देना एवं स्वयं अग्निमें प्रवेश करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 137: भरद्वाजका पुत्रशोकसे विलाप करना, रैभ्यमुनिको शाप देना एवं स्वयं अग्निमें प्रवेश करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.137.16 
सुखिनो वै नरा येषां जात्या पुत्रो न विद्यते।
ते पुत्रशोकमप्राप्य विचरन्ति यथासुखम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में वे लोग धन्य हैं जिनके कोई संतान नहीं है, क्योंकि उन्हें पुत्र न होने का दुःख नहीं होता और वे सदा सुखपूर्वक रहते हैं ॥16॥
 
Happy are those people in this world who have no children because they do not feel the grief of not having a son and live happily ever after. ॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)