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mahabharat 3.137.15: जैसे मैं पापी होकर अपने पुत्र के शोक से शरीर त्याग रहा हूँ, वैसे ही रैभ्य का ज्येष्ठ पुत्र शीघ्र ही अपने निर्दोष पिता को मार डालेगा ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 3.137: भरद्वाजका पुत्रशोकसे विलाप करना, रैभ्यमुनिको शाप देना एवं स्वयं अग्निमें प्रवेश करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 137: भरद्वाजका पुत्रशोकसे विलाप करना, रैभ्यमुनिको शाप देना एवं स्वयं अग्निमें प्रवेश करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.137.15 
यथाहं पुत्रशोकेन देहं त्यक्ष्यामि किल्बिषी।
तथा ज्येष्ठ: सुतो रैभ्यं हिंस्याच्छीघ्रमनागसम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जैसे मैं पापी होकर अपने पुत्र के शोक से शरीर त्याग रहा हूँ, वैसे ही रैभ्य का ज्येष्ठ पुत्र शीघ्र ही अपने निर्दोष पिता को मार डालेगा ॥15॥
 
Just as I, a sinner, am giving up my body out of grief for my son, similarly, the eldest son of Raibhya will soon kill his innocent father. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)