Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.137.11: इस प्रकार श्रेष्ठ ब्राह्मणों के प्रति आपका स्वभाव अत्यंत दयालु था। आपने कभी किसी प्राणी के प्रति कोई अपराध नहीं किया था। फिर भी आपका स्वभाव कुछ कठोर हो गया था ॥11॥ | mahabharat अध्याय 3.137: भरद्वाजका पुत्रशोकसे विलाप करना, रैभ्यमुनिको शाप देना एवं स्वयं अग्निमें प्रवेश करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथा कल्याणशीलस्त्वं ब्राह्मणेषु महात्मसु।
अनागा: सर्वभूतेषु कर्कशत्वमुपेयिवान्॥ ११॥
अनुवाद
इस प्रकार श्रेष्ठ ब्राह्मणों के प्रति आपका स्वभाव अत्यंत दयालु था। आपने कभी किसी प्राणी के प्रति कोई अपराध नहीं किया था। फिर भी आपका स्वभाव कुछ कठोर हो गया था ॥11॥
In this way your nature towards great Brahmins was very benevolent. You never committed any crime against any living being. Even then your nature had become somewhat harsh. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥