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mahabharat 3.137.10: भारद्वाज बोले- बेटा! तुमने ब्राह्मणों के कल्याण के लिए घोर तपस्या की। तुम्हारी तपस्या का उद्देश्य यह था कि ब्राह्मणों को बिना पढ़े ही सभी वेदों का ज्ञान प्राप्त हो जाए।   |   mahabharat अध्याय 3.137: भरद्वाजका पुत्रशोकसे विलाप करना, रैभ्यमुनिको शाप देना एवं स्वयं अग्निमें प्रवेश करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 137: भरद्वाजका पुत्रशोकसे विलाप करना, रैभ्यमुनिको शाप देना एवं स्वयं अग्निमें प्रवेश करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.137.10 
भरद्वाज उवाच
ब्राह्मणानां किलार्थाय ननु त्वं तप्तवांस्तप:।
द्विजानामनधीता वै वेदा: सम्प्रतिभान्त्विति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भारद्वाज बोले- बेटा! तुमने ब्राह्मणों के कल्याण के लिए घोर तपस्या की। तुम्हारी तपस्या का उद्देश्य यह था कि ब्राह्मणों को बिना पढ़े ही सभी वेदों का ज्ञान प्राप्त हो जाए।
 
Bharadwaj said- Son! You did a lot of penance for the welfare of Brahmins. The purpose of your penance was that the Brahmins should get the knowledge of all the Vedas without reading them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)