Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.136.2: भरत! वह आश्रम पुष्पित वृक्षों की पंक्तियों से सुशोभित, अत्यंत सुंदर लग रहा था। उस आश्रम में रैभ्य मुनि की पुत्रवधू किन्नरी बनकर घूम रही थी। यवक्रीत ने उसे देखा। | mahabharat अध्याय 3.136: यवक्रीतका रैभ्यमुनिकी पुत्रवधूके साथ व्यभिचार और रैभ्यमुनिके क्रोधसे उत्पन्न राक्षसके द्वारा उसकी मृत्यु । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स ददर्शाश्रमे रम्ये पुष्पितद्रुमभूषिते।
विचरन्तीं स्नुषां तस्य किन्नरीमिव भारत॥ २॥
अनुवाद
भरत! वह आश्रम पुष्पित वृक्षों की पंक्तियों से सुशोभित, अत्यंत सुंदर लग रहा था। उस आश्रम में रैभ्य मुनि की पुत्रवधू किन्नरी बनकर घूम रही थी। यवक्रीत ने उसे देखा।
Bharata! That hermitage looked very beautiful, decorated with rows of blooming trees. In that hermitage, Raibhya Muni's daughter-in-law was roaming around like a Kinnari. Yavkrit saw her.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥