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mahabharat 3.136.15: जब यवक्रीत ने देखा कि वह राक्षस हाथ में भाला लेकर मुझे मारने के इरादे से मेरी ओर आ रहा है, तो वह अचानक उठा और उस रास्ते से भाग गया जो एक सरोवर की ओर जाता था।   |   mahabharat अध्याय 3.136: यवक्रीतका रैभ्यमुनिकी पुत्रवधूके साथ व्यभिचार और रैभ्यमुनिके क्रोधसे उत्पन्न राक्षसके द्वारा उसकी मृत्यु   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 136: यवक्रीतका रैभ्यमुनिकी पुत्रवधूके साथ व्यभिचार और रैभ्यमुनिके क्रोधसे उत्पन्न राक्षसके द्वारा उसकी मृत्यु  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.136.15 
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य शूलहस्तं जिघांसया।
यवक्री: सहसोत्थाय प्राद्रवद् येन वै सर:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जब यवक्रीत ने देखा कि वह राक्षस हाथ में भाला लेकर मुझे मारने के इरादे से मेरी ओर आ रहा है, तो वह अचानक उठा और उस रास्ते से भाग गया जो एक सरोवर की ओर जाता था।
 
When Yavakrit saw that the demon was coming towards me with a spear in his hand, intending to kill me, he suddenly got up and fled through the path that led to a lake.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)