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mahabharat 3.136.13: भरत! महारथी रैभ्य द्वारा रचित कर्मरूपी सुन्दरी पहले यवक्रीत के सामने प्रकट हुई और उसे मोहित करके उसका जलपात्र छीन लिया।   |   mahabharat अध्याय 3.136: यवक्रीतका रैभ्यमुनिकी पुत्रवधूके साथ व्यभिचार और रैभ्यमुनिके क्रोधसे उत्पन्न राक्षसके द्वारा उसकी मृत्यु   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 136: यवक्रीतका रैभ्यमुनिकी पुत्रवधूके साथ व्यभिचार और रैभ्यमुनिके क्रोधसे उत्पन्न राक्षसके द्वारा उसकी मृत्यु  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.136.13 
ततस्तं समुपास्थाय कृत्या सृष्टा महात्मना।
कमण्डलुं जहारास्य मोहयित्वेव भारत॥ १३॥
 
 
अनुवाद
भरत! महारथी रैभ्य द्वारा रचित कर्मरूपी सुन्दरी पहले यवक्रीत के सामने प्रकट हुई और उसे मोहित करके उसका जलपात्र छीन लिया।
 
Bharata! The beautiful lady in the form of a deed created by the great Raibhya first appeared before Yavakrit and by bewitching him took away his water pot. 13.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)