श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 136: यवक्रीतका रैभ्यमुनिकी पुत्रवधूके साथ व्यभिचार और रैभ्यमुनिके क्रोधसे उत्पन्न राक्षसके द्वारा उसकी मृत्यु  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.136.10 
तत: समभवन्नारी तस्या रूपेण सम्मिता।
अवलुच्यापरां चापि जुहावाग्नौ जटां पुन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उसमें से एक कृत्या स्त्री रूप में प्रकट हुई, जो उसकी पुत्रवधू के समान ही थी। फिर उसने एक और जटा उखाड़ी और उसे पुनः उसी अग्नि में डाल दिया॥10॥
 
From that a Kritya appeared in the form of a woman who was similar in appearance to his daughter-in-law. Then he plucked out another lock of hair and threw it back into the same fire.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)