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mahabharat 3.135.55: 'जिस मनुष्य की मृत्यु निश्चित हो गई हो, वह किसी भी प्रकार से ईश्वर के विधान का उल्लंघन नहीं कर सकता, इसीलिए धनुषाक्ष ने उस बालक की दीर्घायु के लिए भैंसों से पर्वतों को भेदने का कार्य करवाया।'   |   mahabharat अध्याय 3.135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  3.135.55 
न दिष्टमर्थमत्येतुमीशो मर्त्य: कथंचन।
महिषैर्भेदयामास धनुषाक्षो महीधरान्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
'जिस मनुष्य की मृत्यु निश्चित हो गई हो, वह किसी भी प्रकार से ईश्वर के विधान का उल्लंघन नहीं कर सकता, इसीलिए धनुषाक्ष ने उस बालक की दीर्घायु के लिए भैंसों से पर्वतों को भेदने का कार्य करवाया।'
 
'A man destined to die cannot violate the laws of God in any way, that is why Dhanushaksh caused the buffaloes to pierce the mountains for the sake of that child's longevity.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)