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mahabharat 3.135.53: यंत्र के नष्ट होते ही उस ऋषि की अचानक मृत्यु हो गई। तत्पश्चात पिता अपने मृत पुत्र के लिए विलाप करने लगा। 53॥   |   mahabharat अध्याय 3.135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  3.135.53 
स निमित्ते विनष्टे तु ममार सहसा शिशु:।
तं मृतं पुत्रमादाय विललाप तत: पिता॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
यंत्र के नष्ट होते ही उस ऋषि की अचानक मृत्यु हो गई। तत्पश्चात पिता अपने मृत पुत्र के लिए विलाप करने लगा। 53॥
 
As soon as the instrument was destroyed, that sage suddenly died. After that the father started mourning for his dead son. 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)