Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.135.48: बलधि बोले - हे देव! जैसे ये पर्वत सदैव अविनाशी रहते हैं, वैसे ही मेरा पुत्र भी अविनाशी रहे। ये पर्वत ही उसकी दीर्घायु का कारण होंगे अर्थात् जब तक ये पर्वत यहाँ रहेंगे, मेरा पुत्र भी जीवित रहे। 48. | mahabharat अध्याय 3.135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बालधिरुवाच
यथेमे पर्वता: शश्वत् तिष्ठन्ति सुरसत्तमा:।
अक्षयास्तन्निमित्तं मे सुतस्यायुर्भविष्यति॥ ४८॥
अनुवाद
बलधि बोले - हे देव! जैसे ये पर्वत सदैव अविनाशी रहते हैं, वैसे ही मेरा पुत्र भी अविनाशी रहे। ये पर्वत ही उसकी दीर्घायु का कारण होंगे अर्थात् जब तक ये पर्वत यहाँ रहेंगे, मेरा पुत्र भी जीवित रहे। 48.
Baladhi said - O God! Just as these mountains always remain indestructible, similarly my son should also remain indestructible. These mountains will be the reason for his longevity i.e. as long as these mountains remain here, my son should also remain alive. 48.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥