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mahabharat 3.135.43: यवक्रीत ने कहा - पिताश्री! आपको और मुझे सम्पूर्ण वेदों का ज्ञान प्राप्त होगा। साथ ही हम दोनों दूसरों से उच्च पद प्राप्त करेंगे - ऐसा मुझे वरदान मिला है ॥43॥   |   mahabharat अध्याय 3.135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.135.43 
यवक्रीत उवाच
प्रतिभास्यन्ति वै वेदा मम तातस्य चोभयो:।
अति चान्यान् भविष्यावो वरा लब्धास्तदा मया॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
यवक्रीत ने कहा - पिताश्री! आपको और मुझे सम्पूर्ण वेदों का ज्ञान प्राप्त होगा। साथ ही हम दोनों दूसरों से उच्च पद प्राप्त करेंगे - ऐसा मुझे वरदान मिला है ॥43॥
 
Yavakrit said - Father! Both you and I will get the knowledge of the complete Vedas. Along with that, we both will attain a higher status than others - such is the boon I have received. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)