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mahabharat 3.135.4: हे भरतवंशी महापुरुषों! इस पर्वतराज हिमालय पर आरूढ़ होकर तुम शीघ्र ही अपने समस्त धन-सम्पदा और अयोग्य यश को दूर भगा दोगे॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.135.4 
एनं पर्वतराजानमारुह्य भरतर्षभा:।
अयशस्यामसंशब्द्यामलक्ष्मीं व्यपनोत्स्यथ॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे भरतवंशी महापुरुषों! इस पर्वतराज हिमालय पर आरूढ़ होकर तुम शीघ्र ही अपने समस्त धन-सम्पदा और अयोग्य यश को दूर भगा दोगे॥4॥
 
Great men of Bharatvansh! Mounted on this mountain king, Himalaya, you will soon drive away all your wealth-spreading and unworthy fame. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)