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mahabharat 3.135.35: 'ब्रह्मन्! यह क्या है? तुम क्या करना चाहते हो? तुम बहुत प्रयत्न कर रहे हो, पर सब व्यर्थ है।'   |   mahabharat अध्याय 3.135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.135.35 
किमिदं वर्तते ब्रह्मन् किं च ते ह चिकीर्षितम्।
अतीव हि महान् यत्न: क्रियतेऽयं निरर्थक:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
'ब्रह्मन्! यह क्या है? तुम क्या करना चाहते हो? तुम बहुत प्रयत्न कर रहे हो, पर सब व्यर्थ है।'
 
'Brahman! What is this? What do you want to do? You are making great efforts, but it is useless.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)