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mahabharat 3.135.33: वे गंगाजी में मुट्ठी भर रेत डालते रहे और उसे यवक्रीत को दिखाकर उन्होंने पुल बनाने का कार्य आरम्भ किया ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 3.135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.135.33 
वालुकामुष्टिमनिशं भागीरथ्यां व्यसर्जयत्।
सेतुमभ्यारभच्छक्रो यवक्रीतं निदर्शयन्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
वे गंगाजी में मुट्ठी भर रेत डालते रहे और उसे यवक्रीत को दिखाकर उन्होंने पुल बनाने का कार्य आरम्भ किया ॥33॥
 
He kept dropping handfuls of sand into the Ganga and thus, showing it to Yavakrit, he began the work of building the bridge. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)