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mahabharat 3.135.32: जब द्विजों में श्रेष्ठ यवक्रीत ने इन्द्र की आज्ञा नहीं मानी, तब वह गंगाजी को रेत से भरने लगा ॥32॥   |   mahabharat अध्याय 3.135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.135.32 
यदास्य वदतो वाक्यं न स चक्रे द्विजोत्तम:।
वालुकाभिस्तत: शक्रो गङ्गां समभिपूरयन्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जब द्विजों में श्रेष्ठ यवक्रीत ने इन्द्र की आज्ञा नहीं मानी, तब वह गंगाजी को रेत से भरने लगा ॥32॥
 
When Yavakrit, the best of the twins, did not listen to Indra's orders, then he started filling Gangaji with sand. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)