Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.135.28: हे देवराज इन्द्र! यदि आप यहाँ मेरी समस्त इच्छाएँ पूर्ण नहीं करेंगे, तो मैं अपने शरीर के प्रत्येक अंग को प्रज्वलित अग्नि में होम कर दूँगा। कृपया इसे अच्छी तरह समझ लीजिए॥28॥ | mahabharat अध्याय 3.135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
समिद्धेऽग्नावुपकृत्याङ्गमङ्गं
होष्यामि वा मघवंस्तन्निबोध।
यद्येतदेवं न करोषि कामं
ममेप्सितं देवराजेह सर्वम्॥ २८॥
अनुवाद
हे देवराज इन्द्र! यदि आप यहाँ मेरी समस्त इच्छाएँ पूर्ण नहीं करेंगे, तो मैं अपने शरीर के प्रत्येक अंग को प्रज्वलित अग्नि में होम कर दूँगा। कृपया इसे अच्छी तरह समझ लीजिए॥28॥
O King of Gods Indra! If you do not fulfill all my wishes here, then I will sacrifice each and every part of my body in the blazing fire. Please understand this very well.॥28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥