Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.135.25-26: महर्षि यवक्रीत को इस प्रकार तप करते देख इन्द्र उनके पास गए और पुनः मना करते हुए बोले, 'मुनि! आपने ऐसा कार्य आरम्भ किया है जिसका पूरा होना असम्भव है। आपकी यह योजना (कि प्रत्येक ब्राह्मण वेदों को बिना पढ़े ही जान ले) युक्तिसंगत नहीं है; किन्तु वेदों को केवल आप और आपके पिता ही जान सकेंगे।'॥ 25-26॥ | mahabharat अध्याय 3.135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महर्षि यवक्रीत को इस प्रकार तप करते देख इन्द्र उनके पास गए और पुनः मना करते हुए बोले, 'मुनि! आपने ऐसा कार्य आरम्भ किया है जिसका पूरा होना असम्भव है। आपकी यह योजना (कि प्रत्येक ब्राह्मण वेदों को बिना पढ़े ही जान ले) युक्तिसंगत नहीं है; किन्तु वेदों को केवल आप और आपके पिता ही जान सकेंगे।'॥ 25-26॥
Seeing the great sage Yavakrit doing penance in this manner, Indra went to him and again forbade him and said, 'Muni! You have started such a task which is impossible to be accomplished. This plan of yours (for every Brahmin to know the Vedas without reading them) is not sensible; but only you and your father will know the Vedas.'॥ 25-26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥