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mahabharat 3.135.23: लोमश कहते हैं - युधिष्ठिर! ऐसा कहकर इन्द्र चले गए; तब परम पराक्रमी यवक्रीत ने पुनः तपश्चर्या हेतु प्रयत्न आरम्भ कर दिया॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 3.135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.135.23 
लोमश उवाच
एवमुक्त्वा गत: शक्रो यवक्रीरपि भारत।
भूय एवाकरोद् यत्नं तपस्यमितविक्रम:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
लोमश कहते हैं - युधिष्ठिर! ऐसा कहकर इन्द्र चले गए; तब परम पराक्रमी यवक्रीत ने पुनः तपश्चर्या हेतु प्रयत्न आरम्भ कर दिया॥ 23॥
 
Lomasha says - Yudhishthira! Having said this, Indra left; then the very valiant Yavakrit again started his earnest efforts for penance.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)