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mahabharat 3.135.2: कहते हैं कि वृत्रासुर को मारने के बाद जब शचीपति इन्द्र दरिद्र हो गए, तब समंगा नदी में स्नान करने मात्र से ही वे अपने समस्त पापों से मुक्त हो गए॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 3.135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.135.2 
अलक्ष्म्या किल संयुक्तो वृत्रं हत्वा शचीपति:।
आप्लुत: सर्वपापेभ्य: समङ्गायां व्यमुच्यत॥ २॥
 
 
अनुवाद
कहते हैं कि वृत्रासुर को मारने के बाद जब शचीपति इन्द्र दरिद्र हो गए, तब समंगा नदी में स्नान करने मात्र से ही वे अपने समस्त पापों से मुक्त हो गए॥ 2॥
 
It is said that after killing Vritraasura, when Sachipati Indra became poor, he could get rid of all his sins only by taking a dip in the river Samanga.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)