Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.135.16: यह देखकर तेजस्वी यवक्रीत अत्यन्त दुःखी हो गये। पाण्डुनन्दन! क्रोध से ग्रस्त होकर वे वेदों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए घोर तप में लग गये। 16॥   |   mahabharat अध्याय 3.135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.135.16 
पर्यतप्यत तेजस्वी मन्युनाभिपरिप्लुत:।
तपस्तेपे ततो घोरं वेदज्ञानाय पाण्डव॥ १६॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर तेजस्वी यवक्रीत अत्यन्त दुःखी हो गये। पाण्डुनन्दन! क्रोध से ग्रस्त होकर वे वेदों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए घोर तप में लग गये। 16॥
 
Seeing this, Tejasvi Yavakrit got very sad. Pandunandan! Obsessed with anger, he engaged in severe penance to acquire the knowledge of the Vedas. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)