Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.135.15: हे निष्पाप युधिष्ठिर! यवक्रीत ने देखा कि लोग उसके तपस्वी पिता का आदर नहीं करते; किन्तु रैभ्य और उसके पुत्रों का ब्राह्मणों द्वारा बड़ा आदर किया जाता है। | mahabharat अध्याय 3.135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे निष्पाप युधिष्ठिर! यवक्रीत ने देखा कि लोग उसके तपस्वी पिता का आदर नहीं करते; किन्तु रैभ्य और उसके पुत्रों का ब्राह्मणों द्वारा बड़ा आदर किया जाता है।
O sinless Yudhishthira! Yavakrit saw that people do not honour his ascetic father; but Raibhya along with his sons are honoured greatly by the Brahmins.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥