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mahabharat 3.135.13: रैभ्य के दो पुत्र थे - अर्वावसु और परवसु। भारत भारद्वाज के पुत्र का नाम 'यवक्री' या 'यवक्रीत' था। 13॥   |   mahabharat अध्याय 3.135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 135: कर्दमिलक्षेत्र आदि तीर्थोंकी महिमा, रैभ्य एवं भरद्वाजपुत्र यवक्रीत मुनिकी कथा तथा ऋषियोंका अनिष्ट करनेके कारण मेधावीकी मृत्यु  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.135.13 
रैभ्यस्य तु सुतावास्तामर्वावसुपरावसू।
आसीद् यवक्री: पुत्रस्तु भरद्वाजस्य भारत॥ १३॥
 
 
अनुवाद
रैभ्य के दो पुत्र थे - अर्वावसु और परवसु। भारत भारद्वाज के पुत्र का नाम 'यवक्री' या 'यवक्रीत' था। 13॥
 
Raibhya had two sons – Arvavasu and Paravasu. India The name of Bharadwaja's son was 'Yavakri' or 'Yavkrit'. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)