Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.134.8: तब बंदी ने कहा - अष्टावक्र! एक ही अग्नि अनेक प्रकार से प्रकाशित होती है, एक ही सूर्य समस्त जगत को प्रकाशित करता है। शत्रुओं का नाश करने वाले देवताओं के राजा वीर इन्द्र एक ही हैं, तथा पितरों के स्वामी यमराज भी एक ही हैं। | mahabharat अध्याय 3.134: बन्दी और अष्टावक्रका शास्त्रार्थ, बन्दीकी पराजय तथा समङ्गामें स्नानसे अष्टावक्रके अंगोंका सीधा होना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब बंदी ने कहा - अष्टावक्र! एक ही अग्नि अनेक प्रकार से प्रकाशित होती है, एक ही सूर्य समस्त जगत को प्रकाशित करता है। शत्रुओं का नाश करने वाले देवताओं के राजा वीर इन्द्र एक ही हैं, तथा पितरों के स्वामी यमराज भी एक ही हैं।
Then the prisoner said - Ashtavakra! One and the same fire shines in many ways, one and the same Sun illuminates the whole world. There is only one brave Indra, the king of gods who destroys enemies, and there is only one Yamraj, the lord of ancestors.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥